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हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की आज 114वीं जयंती, जानें उनसे जुड़ी कुछ खास बातें

हाईलाइट

  • ध्यानचंद ने भारत के लिए 1928, 1932 और 1936 में 3 ओलंपिक गोल्ड मेडल जीते
  • ध्यानचंद ने अपने 1926 से 1948 तक के करियर में 400 से अधिक गोल किए

हॉकी के महान खिलाड़ी व जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद का आज 114वां जन्मदिन है। ध्यानचंद के जन्मदिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इसी दिन सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न के अलावा अर्जुन, ध्यानचंद और द्रोणाचार्य पुरस्कार भी दिए जाते हैं। ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 में इलाहाबाद में हुआ था। ध्यानचंद को खेल जगत की दुनिया में ‘दद्दा’ कहकर भी पुकारते हैं।

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मेजर ध्यानचंद की आज 113वीं वर्षगांठ, ब्रैडमैन और हिटलर भी थे उनके फैन

मेजर ध्यानचंद की आज 113वीं वर्षगांठ, ब्रैडमैन और हिटलर भी थे उनके फैन

NEWS HIGHLIGHTS

  •  ध्यानचंद तीन बार ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे
  •  मेजर ध्यानचंद ने अतंरराष्ट्रीय हॉकी में 400 गोल दागे
  •  साल 1956 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय हॉकी के पूर्व खिलाड़ी एवं कप्तान मेजर ध्यानचंद सिंह की आज 113वीं वर्षगांठ है। भारत में उनकी जन्मतिथि 29 अगस्त को “राष्ट्रीय खेल दिवस” के रूप में भी मनाया जाता है। इसी दिन हर साल खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न के अलावा अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्कार दिए जाते हैं। इस बार जकार्ता में जारी एशियन गेम्स की वजह से खेल रत्न और अर्जुन अवॉर्ड समारोह के आयोजन की तारीख बदल दी गई है अब यह समारोह सितंबर में होगा।

ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद में हुआ था। उनकी गिनती भारत एवं विश्व हॉकी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में की जाती है और उन्हें हॉकी का जादूगर भी कहा जाता है। वे तीन बार ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा भी रहे। उन्होंने अपने खेल जीवन में 1000 से अधिक गोल दागे। जब वे मैदान में खेलने उतरते थे तो गेंद मानों उनकी हॉकी स्टिक से चिपक-सी जाती थी। उन्हें 1956 में भारत के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।

मेजर ध्यानचंद सिंह की 113वीं वर्षगांठ के अवसर पर जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें –

  • ध्यानचंद तीन बार ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे। 1928 का एम्सटर्डम ओलिंपिक, 1932 का लॉस एंजेल्स ओलिंपिक एवं 1936 का बर्लिन ओलिंपिक।
  • 1928  एम्सटर्डम ओलिंपिक खेलों में वह भारत की ओर से सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी रहे। उस टूर्नमेंट में उन्होंने 14 गोल किए। इस पर एक स्थानीय समाचार पत्र में लिखा था, ‘यह हॉकी नहीं बल्कि जादू है और ध्यानचंद हॉकी के जादूगर हैं।
  • ध्यानचंद को फुटबॉल में पेले और क्रिकेट में ब्रैडमैन के समान माना जाता है। सर डॉन ब्रैडमैन 1935 में एडिलेड में ध्यानचंद से मिले थे। ध्यानचंद को खेलते देख, ब्रैडमैन ने कहा कि ध्यानचंद ऐसे गोल करते हैं जैसे क्रिकेट में रन बनते हैं।
  • उनके छोटे भाई रूप सिंह भी एक अच्छे हॉकी खिलाड़ी थे जिन्होंने ओलिंपिक में कई गोल किए थे।
  • 1932 के ओलंपिक फाइनल में भारत ने अमेरिका को 24-1 से हराया था। उस मैच में ध्यानचंद ने 8 गोल और उनके भाई रूप सिंह ने 10 गोल किए थे। उस टूर्नमेंट में भारत की ओर से किए गए कुल 35 गोलों में से 25 गोल दोनों भाइयों ने किए थे। जिसमें रूप सिंह ने 15 गोल और मेजर ध्यानचंद के 10 गोल थे। एक मैच में 24 गोल दागने का 86 साल पुराना यह रिकॉर्ड हाल ही में भारतीय हॉकी टीम ने इंडोनेशिया में जारी एशियाई खेलों में हॉन्ग कॉन्ग को 26-0 से मात देकर तोड़ा।
  • ध्यानचंद ने 16 साल की उम्र में भारतीय सेना जॉइन की थी। इसके बाद ही उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया था। ध्यानचंद रात को काफी प्रैक्टिस किया करते थे। इसलिए उनके साथी खिलाड़ियों ने उन्हें ‘चांद’ नाम दे दिया।
  • गेंद इस कदर उनकी स्टिक से चिपकी रहती कि प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को अक्सर आशंका होती कि वह जादुई स्टिक से खेल रहे हैं। यहाँ तक हॉलैंड में उनकी हॉकी स्टिक में चुंबक होने की आशंका जताई गई थी और उनकी स्टिक को तोड़ कर देखा गया था। इसके बाद जापान में ध्यानचंद की हॉकी स्टिक में गोंद लगे होने की बात कही गई।
  • ध्यानचंद ने बताया था कि, उन्हें 1933 में झांसी हीरोज और कलकत्ता कस्टम्स के बीच खेला गया बिगटन क्लब फाइनल उनका सबसे ज्यादा पसंदीदा मुकाबला था।
  • विएना के एक स्पोर्ट्स क्लब में ध्यानचंद के चार हाथों वाली मूर्ति लगी है, जिसमें उनके हाथों में हॉकी स्टिक हैं। यह मूर्ति हॉकी में उनकी महानता और जादू को दर्शाती है।
  • मेजर ध्यानचंद ने अतंरराष्ट्रीय हॉकी में 400 गोल दागे। अपने 22 साल के हॉकी करियर में उन्होंने अपने खेल से पूरी दुनिया को हैरान किया।
  • बर्लिन ओलिंपिक में ध्यानचंद के शानदार प्रदर्शन से प्रभावित होकर हिटलर ने उन्हें डिनर के लिए आमंत्रित किया था। जर्मन तानाशाह ने उन्हें जर्मनी की ओर से हॉकी खेलने को कहा। लेकिन ध्यानचंद ने उसे ठुकराते हुए हिटलर को अपने ही अंदाज में जवाब दिया, ‘हिंदुस्तान ही मेरा वतन है और मैं उसी के लिए पूरा जीवन हॉकी खेलता रहूंगा।’
  • मेजर ध्यानचंद को भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया। उन्हें साल 1956 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
  • ध्यानचंद का 3 दिसंबर, 1979 को दिल्ली में निधन हुआ था। झांसी में उनका अंतिम संस्कार उसी मैदान पर किया गया, जहां वे हॉकी खेला करते थे।

Source: https://www.bhaskarhindi.com/news/113th-anniversary-of-former-indian-hockey-captain-dhyan-chand-46848