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कश्मीर पर ‘सुप्रीम’ डे, आर्टिकल 370 पर आज सुनी जाएंगी 10 याचिकाएं

हाईलाइट

  • जम्मू-कश्मीर पर आज ‘सुप्रीम’ सुनवाई
  • सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 370 पर आज सुनी जाएंगी 10 याचिकाएं
  • मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ दायर की गई हैं 10 याचिकाएं

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद आज (मंगलवार) को 10 याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। सभी 10 याचिकाएं को लेकर दायर की गई थी। मोदी सरकार ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देने वाले संविधान के आर्टिकल 370 को हटा दिया था। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केन्द्र शासित राज्य बनाने के बाद कई संगठन, नेता और ग्रुप सरकार के इस फैसले के खिलाफ हैं।

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इतिहास में पहली बार HC के सिटिंग जज पर दर्ज होगा केस, SC ने CBI को दी अनुमति

हाईलाइट

  • भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसीए) के तहत इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति एसएन शुक्ला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए सीबीआई को अनुमति दी है
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस एसएन शुक्ला पर हैं भ्रष्‍टाचार के गंभीर आरोप
  • यूपी के मेडिकल कॉलेज में MBBS के लिए प्रवेश में अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप
  • CJI ने CBI को जस्टिस एसएन शुक्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अनुमति दी

इतिहास में पहली बार हाईकोर्ट के सिटिंग जज के खिलाफ केस दर्ज होगा। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस एसएन शुक्ला खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अनुमति सीबीआई को दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने सीबीआई को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस एसएन शुक्ला के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधी कानून (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन ऐक्ट) के तहत मुकदमा दर्ज करने की इजाजत दी है। देश के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब सीबीआई हाईकोर्ट के किसी सिटिंग जज के खिलाफ केस दर्ज करेगा।

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वेंकैया नायडू ने खारिज किया CJI पर विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव नोटिस

वेंकैया नायडू ने खारिज किया CJI पर विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव नोटिस

NEWS HIGHLIGHTS

  •  । सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है।
  •  उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को संविधानविदों और कानूनी विशेषज्ञों से बातचीत की थी।
  •  कानूनी सलाह के बाद वेंकैया नायडू ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को संविधानविदों और कानूनी विशेषज्ञों से बातचीत की थी। कांग्रेस की अगुवाई में 7 विपक्षी पार्टियों ने उपराष्ट्रपति के सामने ये प्रस्ताव पेश किया गया था, लेकिन कानूनी सलाह के बाद वेंकैया नायडू ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। नायडू ने इस प्रस्ताव पर अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल, संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, पूर्व विधि सचिव पीके मल्होत्रा समेत अन्य विशेषज्ञों से कानूनी राय ली है। महाभियोग प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के लिए नायडू अपना हैदराबाद दौरा अधूरा छोड़कर वापस दिल्ली लौटे थे। बता दें कि 20 अप्रैल को कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में 7 विपक्षी पार्टियों ने राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति एम.वेकैंया नायडू से मुलाकात कर चीफ जस्टिसदीपक मिश्रा को हटाने के लिए एक महाभियोग प्रस्ताव सौंपा था।

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ANI

@ANI

Vice President M Venkaiah Naidu rejects the Impeachment Motion against CJI Dipak Misra.

महाभियोग के प्रस्ताव के बाद से ही सभी की नज़रें वेंकैया नायडू पर टिकी थीं बता दें कि शुक्रवार को कांग्रेस सहित 7 विपक्षी दलों ने राज्यसभा के सभापति नायडू को चीफ जस्टिस मिश्रा के खिलाफ कदाचार का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए नोटिस दिया था।

 

 वहीं कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट में अरसे से प्रैक्टिस कर रहे कपिल सिब्बल ने ऐलान कर दिया है कि अगर जस्टिस दीपक मिश्रा रिटायरमेंट तक पद पर बने रहते हैं तो वे उनकी कोर्ट में पेश नहीं होंगे। सिब्बल ने कहा कि मेरे साथ 63 अन्य लोगों ने भी जस्टिस दीपक मिश्रा को हटाने की मांग की है। अब मैं सोमवार से सीजेआई की अदालत में नहीं जाऊंगा।

प्रस्ताव खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट का रूख करेगी कांग्रेस!

उधर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ठुकराते हैं तो पार्टी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कांग्रेस नेताओं का मानना है कि CJI के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को वेंकैया नायडू निश्चित तौर पर ठुकरा देंगे, ऐसी स्थिति में सभापति के फैसले को चुनौती दी जा सकती है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस मामले में न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। कांग्रेस नेताओं का यह भी कहना है कि महाभियोग प्रस्ताव आने के बाद CJI को खुद न्यायिक कार्य से अलग हो जाना चाहिए।

71 सांसदों ने किए थे प्रस्ताव पर हस्ताक्षर

CJI दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर 7 राजनीतिक दलों के 71 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें से 7 रिटायर हो चुके हैं। इसमें गौर करने वाली बात यह है कि इस नोटिस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इससे यह भी साफ है कि कांग्रेस पार्टी के अंदर भी कई ऐसे नेता हैं, जो इस महाभियोग को समर्थन नहीं दे रहे हैं।

क्या था चीफ जस्टिस विवाद

सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने इस साल जनवरी में देश के इतिहास में पहली बार चीफ जस्टिस पर सवाल खड़े किए थे। इन जजों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है और यदि ऐसा ही चलता रहा, तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। जजों द्वारा उठाए गए इन मुद्दों पर जमकर बवाल मचा था। तमाम विपक्षी पार्टियों ने इस मुद्दे पर केन्द्र सरकार की खिंचाई की थी। सीपीएम महासचिव सीतराम येचुरी ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर जस्टिस मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की बात भी कही थी।

जस्टिस जे चेलामेश्वर के नेतृत्व में जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीफ जस्टिस को सवालों के घेरे में लिया था। चारों जजों ने सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न मामलों को आवंटित करने में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। जजों का यह आरोप था कि चीफ जस्टिस की ओर से कुछ मामलों को चुनिंदा बेंचों और जजों को ही दिया जा रहा है।  जजों ने इस दौरान जस्टिस लोया केस का मामला जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच को सौंपने पर भी सवाल खड़ा किया था। बता दें कि जस्टिस बीएच लोया की 1 दिसंबर 2014 को हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। वे सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे। गुजरात के इस चर्चित मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत गुजरात पुलिस के कई आला अधिकारियों के नाम आए थे।

मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए चार जजों ने कहा था, ‘करीब दो महीने पहले हमनें चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर बताया कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक से नहीं चल रहा है लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए हमनें देश के सामने यह बात रखने की सोची।’ इस दौरान जजों ने यह भी कहा था कि वे नहीं चाहते कि 20 साल बाद कोई बोले कि जस्टिस चेलामेश्वर, गोगोई, लोकुर और कुरियन जोसेफ ने अपनी आत्मा बेच दी और संविधान के मुताबिक सही फैसले नहीं दिए।

Source: Bhaskarhindi.com

CJI के खिलाफ ‘महाभियोग प्रस्ताव’ लाने की तैयारी में CPI-M

CJI के खिलाफ 'महाभियोग प्रस्ताव' लाने की तैयारी में CPI-M
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट) ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) दीपक मिश्रा के खिलाफ ‘महाभियोग प्रस्ताव’ लाने की तैयारी में जुट गई है। मंगलवार को सीपीआई (एम) के जनरल सेक्रेटरी सीताराम येचुरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ‘ये मामला अब तक सुलझता दिखाई नहीं दिखाई दे रहा है। हम अपोजिशन से बात कर रहे हैं और संभव हुआ तो बजट सेशन में ही CJI के खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है।’ बता दें कि 12 जनवरी को जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ की प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CJI दीपक मिश्रा पर कई आरोप लगाए थे।

और क्या कहा सीताराम येचुरी ने?

सीपीआई (एम) के जनरल सेक्रेटरी सीताराम येचुरी ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि ‘सुप्रीम कोर्ट में जजों का विवाद अभी तक खत्म होता नहीं दिखाई दे रहा है। ऐसे में कार्यपालिका को अब इसमें दखल देने का वक्त आ गया है। हम अपोजिशन पार्टियों से बजट सेशन में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर चर्चा कर रहे हैं।’ बता दें कि संसद का बजट सेशन 29 जनवरी से शुरू हो रहा है।

2 हफ्ते बीत गए, अभी तक नहीं सुलझा मसला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके आगे सीपीआई (एम) के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि ‘हमें उम्मीद थी कि ये मुद्दा कोर्ट के अंदर ही सुलझा लिया जाएगा, लेकिन 2 हफ्ते बीत गए हैं और ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसलिए मुझे लगता है कि अब विधायिका को एकजुट होना होगा, ताकि न्यायपालिका की अखंडता और स्वतंत्रता को सुनिश्चित किया जा सके।’ बताया ये भी जा रहा है कि कांग्रेस से जुड़े विपक्षी नेता एक-दूसरे से संपर्क में हैं और जल्द ही इस मसले पर कांग्रेस अपनी रणनीति साफ कर सकती है।

कौन हैं वो 4 जज, जिन्होंने उठाए चीफ जस्टिस पर सवाल ?

12 जनवरी को 4 जजों ने की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस

दरअसल, देश के इतिहास में पहली बार 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉनफ्रेंस की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने मीडिया से बात की। इस दौरान जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा कि ‘सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है और अगर ऐसा ही चलता रहा तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा।’ उन्होंने बताया कि इस बात की शिकायत उन्होंने चीफ जस्टिस के सामने भी की, लेकिन उन्होंने बात को नहीं माना। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा कि ‘किसी भी देश के लोकतंत्र के लिए जजों की स्वतंत्रता भी जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता है तो लोकतंत्र नहीं बच पाएगा। हमने चीफ जस्टिस को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो नहीं समझ पाए।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘हमारे पास इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं था, इसी कारण मजबूरी में हमें मीडिया के सामने आना पड़ा।’ इसके अलावा इन चारों जजों ने चीफ जस्टिस पर ये भी आरोप लगाए कि ‘चीफ जस्टिस सीनियर जजों की बात नहीं सुनते हैं।’

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अभी तक नहीं सुलझा मामला

सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद CJI दीपक मिश्रा से मुलाकात भी की थी, लेकिन मामला अभी तक सुलझाया नहीं जा चुका है। इस विवाद पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन मिश्रा ने कहा था कि ‘ये घर का मामला था और इसे घर में सुलझा लिया गया है।’ वहीं अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भी कहा था कि मामला सुलझा लिया गया है, लेकिन बाद में अपनी बात से पलटते हुए कहा था कि ‘ये मामला अभी तक सुलझा नहीं है, लेकिन उम्मीद है कि इसे 2-3 में सुलझा लिया जाएगा।’ हालांकि, अभी तक सुप्रीम कोर्ट के जजों का विवाद सुलझता दिखाई नहीं दे रहा है।

पहली बार कोई महिला एडवोकेट सीधे बनेंगी सुप्रीम कोर्ट में जज

CJI ने बनाई बेंच, बागी जजों को जगह नहीं

वहीं सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने 8 बड़े मामलों के लिए 5 जजों की एक संवैधानिक बेंच बनाई थी। इस बेंच में CJI दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं। CJI दीपक मिश्रा की अगुवाई में बनी ये 5 जजों की कॉन्स्टीट्यूशन बेंच में उन 4 जजों (जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ) को शामिल नहीं किया गया है, जिन्होंने 12 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।

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क्या होता है महाभियोग ? 

भारत के संविधान के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट या किसी हाईकोर्ट के जज को सिर्फ ‘महाभियोग’ के जरिए ही हटाया जा सकता है। महाभियोग को ‘इंपीचमेंट’ कहा जाता है, जिसका लैटिन भाषा में मतलब होता है ‘पकड़े जाना’। भारतीय संविधान में महाभियोग का उल्लेख आर्टिकल 124(4) में मिलता है। इसके तहत अगर किसी भी कोर्ट के जज पर कोई आरोप लगता है, तो उसे महाभियोग लाकर पद से हटाया जा सकता है। महाभियोग के जरिए किसी जज को पद से हटाने के लिए लोकसभा के 100 सांसद और राज्यसभा के 50 सांसदों की सहमति जरूरी होती है। इसके साथ ही महाभियोग के जरिए किसी जज को तभी पद से हटाया जा सकता है, जब ये प्रस्ताव संसद को दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पास होता है। हालांकि अभी तक देश में किसी भी जज के खिलाफ महाभियोग नहीं चलाया गया है।

Source: bhaskarhindi.com