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संकष्टी गणेश चतुर्थी : इस व्रत से सभी कष्ट होंगे दूर, जानें पूजा विधि

पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्णपक्ष की तिथि संकष्टी चतुर्थी कहलाती है, जो 22 मई बुधवार को यानी कि आज मनाई जा रही है। संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है संकट को हरने वाली चतुर्थी होता है। इस व्रत से समस्त कष्ट दूर होते हैं और धर्म, अर्थ, मोक्ष, विद्या, धन व आरोग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन विघ्नहर्ता गणेश जी का पूजन किया जाता है। आपको बता दें हर महीने दो दिन चतुर्थी तिथि पड़ती है। भविष्य पुराण में कहा गया है कि जब मन संकटों से घिरा हुआ लगे तब गणेश चतुर्थी का व्रत करें। 

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अपरा एकादशी व्रत से नष्ट होंगे ये पाप, जानें पूजा विधि और कथा

ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा या अचला एकादशी कहते हैं। इस बार ये एकादशी 30 मई गुरुवार को है। इस एकादशी व्रत को पुण्य फल देने वाला बताया गया है। इसके प्रभाव से मनुष्य के कीर्ति, पुण्य और धन में वृद्धि होती है। इस व्रत के पुण्य से ब्रह्म हत्या, असत्य भाषण, झूठा वेद पढ़ने से लगा हुआ पाप आदि नष्ट हो जाता है। इससे भूत योनी से भी मुक्ति मिल जाती है।

इस व्रत को करने से मनुष्य को तीनों पुष्करों में स्नान के समान, गंगा जी के तट पर पिण्ड दान के समान और कार्तिक मास के स्नान के समान, सूर्य-चंद्र ग्रहण में कुरुक्षेत्र में यज्ञ, दान एवं स्नान के पुण्य के समान फल की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान त्रिविक्रम की पूजा करते हैं।

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ज्येष्ठ माह कल से होगा शुरू, इन कार्यों से मिलेगी वरुण और सूर्य देव की कृपा

हिन्दू कैलेंडर में ज्येष्ठ का महीना तीसरा महीना होता है जो इस बार 19 मई यानी शनिवार से शुरू होगा और 17 जून तक रहेगा। इस महीने में सूर्य अत्यंत ताकतवर होता है, इसलिए गर्मी भी भयंकर होती है। सूर्य की ज्येष्ठता के कारण इस माह को ज्येष्ठ कहा जाता है। चूंकि ज्येष्ठ का महीना वैशाख के महीने के बाद आता है। अंग्रेजी कैलेंडर की बात करें तो ये महीना हमेशा जून और मई के महीने में ही आता है। ऐसे में माना जाता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होता है। इसलिए भी इस महीने को ज्येष्ठ नाम दिया गया है।

करें ये कार्य

इस महीने में धर्म का सम्बन्ध जल से जोड़ा गया है, ताकि जल का संरक्षण किया जा सके। इस मास में सूर्य और वरुण देव की उपासना विशेष फलदायी होती है। इस माह में कुछ आसान उपायों से जल (वरुण) देव और सूर्य की कृपा पाई जा सकती है। इस माह में नित्य प्रातः और संभव हो तो सायं भी पौधों में जल दें। इस माह में गर्मी काफी तेज होती है और जल संकट भी, ऐसे में प्यासों को पानी पिलाएं, लोगों को जल पिलाने की व्यवस्था करें। इस माह में जल की बर्बादी न करें, घड़े सहित जल और पंखों का दान करें।  नित्य प्रातः और सायं सूर्य मंत्र का जाप करें और यदि सूर्य सम्बन्धी समस्या है तो ज्येष्ठ के हर रविवार को उपवास रखें।

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दुनियाभर में आज मनाई जा रही बुद्ध जयंती, जानें महत्व

बुद्ध पूर्णिमा को भगवान गौतम बुद्ध की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो कि आज 18 मई को दुनियाभर में धूमधाम से मनाई जा रही है। इस दिन ही तथागत गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। आज वैदिक ग्रंथों के अनुसार भगवान बुद्ध नारायण के अवतार हैं। दुनिया के कई हिस्सों में मनाई जाने वाली बुद्ध जयंती का भारत में खासा महत्व है। दरअसल भारत के सन्यासी राजा सिद्धार्थ गौतम के जरिए बौद्ध धर्म की नींव रखी गई थी, जिसे आज पुरी दुनिया में जाना जात है।

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मोहिनी एकादशी व्रत आज: इस पूजा विधि से मनोकामना पूरी होगी, मिटेंगे पाप

वैशाख मास की एकादशी को मोहिनी एकादशी मनाई जाती है। जो 15 मई यानी आज बुधवार को मनाई जा रही है। मान्यता के अनुसार मोहिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से हर प्रकार के पाप तथा दुःख मिट जाते हैं। यह व्रत मोह बंधन से मुक्ति दिलाता है। शास्त्रों के अनुसार प्राचीन समय में देवता और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। जब इस मंथन में अमृत निकला तो इसे पाने के लिए देवता और दानवों में युद्ध होने लगा। तब भगवान विष्णु ने इसी तिथि पर मोहिनी रूप में अवतार लिया था। मोहिनी रूप में अमृत लेकर देवताओं को इसका सेवन करवाया था।

करें ये कार्य

मोहिनी एकादशी के दिन जलाशय का निर्माण, देवी-देवताओं की प्राणप्रतिष्ठा, घर में नववधु का प्रवेश, नव कार्य, वाहन क्रय-विक्रय, गृह प्रवेश, नवनिर्माण आदि कार्य किया जा सकता है। इस दिन पूजा पाठ करने से हर मनोकामना पूरी होती है और साथ ही किए हुए पापों से भी मुक्ति मिलती है।

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सीता नवमी आज, व्रत-पूजन से मिलेगी रोग व संतापों से मुक्ति

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को सीता नवमी कहते हैं। इस दिन माता सीता प्रकट हुई थीं, इसलिए इसे जानकी जयंती भी कहते हैं। इस वर्ष जानकी जयंती 13 मई सोमवार यानी की आज मनाई जा रही है। मान्यता के अनुसार राम-जानकी की विधि-विधान से पूजा की जाती है और सुहागिन महिलाएं अपने सौभाग्य रक्षा और पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत-पूजन करने से भूमि दान, तीर्थ भ्रमण फल के साथ ही व्रती को सभी दुखों, रोगों व संतापों से मुक्ति मिलती है। 

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वैदिक मंत्रोचार के साथ खुले बद्रीनाथ धाम के कपाट, जय बद्री विशाल के गूंजे जयकारे

हाईलाइट

  • बद्रीनाथ धाम के बिना अधूरी मानी जाती है चारों धाम यात्रा
  • अब से 6 महीने तक बद्रीनाथ धाम के कपाट खुले रहेंगे
  • बद्रीनाथ धाम को कहा जाता है धरती का वैकुण्ठ

चारों धाम की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बद्रीनाथ धाम के कपाट खोल दिए गए हैं। पूरे विधि विधान और वैदिक मंत्रोचार के साथ शुक्रवार को ब्रह्म मुहूर्त में प्रात: 4 बजकर 15 मिनट पर कपाट खोले गए। इस दौरान भक्तों ने जय बद्री विशाल के जयकारे लगाए, बता दें कि अब से 6 महीने तक धाम के कपाट खुले रहेंगे।

उत्तराखण्ड की इस चार धाम की यात्रा में बद्रीनाथ धाम को चौथा पड़ाव को माना जाता है। गंगा का उद्गम मानने जाने वाले गंगोत्री धाम और उत्तरकाशी जिले की यमुना घाटी में स्थित यमुनोत्री धाम के बाद श्रद्धालू केदारनाथ के दर्शन करते हैं और आखिर में बद्रीनाथ धाम पर आकर यह यात्रा पूरी होती है। मान्‍यता के अनुसार केदारनाथ धाम, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा के बाद यदि आपने बद्रीनाथ धाम की यात्रा नहीं की तो आपकी चारधाम यात्रा अधूरी मानी जाती है।

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