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Nirbhaya verdict: फांसी से पहले बुरी तरह गिड़गिड़िया और रोया था ये दोषी, लेकिन काम नहीं आए ​हथकंडे

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सात साल पहले हुए निर्भया कांड के चारों दोषियों को शुक्रवार सुबह ठीक 5.30 बजे तिहाड़ जेल के फांसी घर में फांसी दी गई। इसके पहले चारों दोषियों ने अपने बचाव की पूरी कोशिश की जो नाकामयाब रही। वहीं फांसी के लिए जरूरी प्र​क्रियाओं को पूरा करने के दौरान भी दोषियों ने अपना रोना- गाना करने के साथ ही एक बार फिर से माफी मांगी, हालांकि उनके ये हथकंडे भी काम नहीं आए और आखिरकार चारों की फांसी के साथ ही निर्भया को आज इंसााफ मिला। 

बता दें कि 16 दिसंबर 2012 को हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। निर्भया को इंसाफ दिलाने देश के कोने कोने में लोग सड़क पर उतरे थे। फिलहाल जानते हैं फांसी के पहले दोषियों के वकील ने बचाव में क्या किया और रातभर कैसा था चारों दोषियों का हाल…

निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाया, डॉक्टर दोषियों को मृत किया

वकील ने अपनाए ये हथकंडे
फांसी दिए जाने से पहले निर्भया के दोषियों के वकील एपी सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट में डेथ वारंट को टालने के लिए याचिका दायर की, लेकिन गुरुवार रात साढ़े बारह बजे के करीब दोषियों के खिलाफ फैसला आया। दोषियों के वकील ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन इस फांसी को टाली जाने वाली कोई खास दलील यहां नहीं दे सके। जिसके बाद शुक्रवार तड़के करीब 3.30 बजे सुप्रीम कोर्ट ने भी इस याचिका को खारिज कर दिया। 

ऐसी गुजरी रात
जेल सूत्रों के अनुसार, फांसी से पहले निर्भया के दोषियों को गुरुवार की रात नींद नहीं आई। चारों इस रात काफी बेचैन रहे, इसके बाद तड़के चार बजे तिहाड़ जेल के अधिकारी चारों दोषियों के पास पहुंचे। यहां फांसी से पहले की जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद जब दोषियों से नहाने को कहा गया, तो उन्होंने इंकार कर दिया। दोषियों ने कपड़े बदलने के लिए भी मना किया। 

कपड़े बदलने से किया इंकार
सूत्रों ने बताया कि दोषी विनय ने कपड़े बदलने से मना किया और रोते हुए माफी भी मांगी। दोषियों ने फांसी से बचने के लिए बार- बार माफी मांगी। हालांकि चारों को जेल से बाहर लाने से पहले सफेद कुर्ता-पजामा पहनाया गया। वहीं जेल प्रशासन ने चाय-नाश्ता के लिए पूछा, जिसके लिए दोषियों ने इंकार कर दिया। अंत में उनकी आखिरी इच्छा पूछी गई।

7 साल 3 महीने और 3 दिन, हैवानियत की रात से फांसी तक की कहानी

फंदे तक ले जाने में मशक्कत
चारों दोषियों को जब फांसी के फंदे के पास ले जाया जा रहा था तो वे इसके लिए तैयार नहीं थे। जेल सूत्रों के मुताबिक जब चारों गुनहगारों को फांसी के लिए लेकर जाना था तो इनमें से एक दोषी विनय कह रहा था मैं मरना नहीं चाहता। वह बुरी तरह गिड़गिड़िया और कहा, ”मुझे माफ कर दो… मुझे नहीं मरना। इसके बाद वह जमीन में लेटने लगा, ऐसे में उसे ले जाने के लिए काफी मशक्कत करना पड़ी। 

यहां भी नहीं हुए तैयार
जेल सूत्रों ने बताया कि फांसी देने से पहले जब चारों के हाथ पीछे की ओर करके बांधे जा रहे थे तब भी दोषी तैयार नहीं हो रहे थे, लेकिन उनकी कोई बात नहीं सुनी गई। इसके बाद चारों के चेहरे काले कपड़े से ढक दिए गए और गले में फंदा डाला गया। इसके बाद दोषियों के पैरों को बांधा गया और जेल सुपरिटेंडेंट का इशारा मिलते ही पवन जल्लाद ने लीवर खींच दिया। इसी के साथ निर्भया को इंसाफ मिल गया। 

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निर्भया जस्टिस: 4 साल 7 म​हीने और 21 दिन पहले मेमन को दी थी फांसी, आजाद भारत में गोडसे को मिली पहली फांसी 

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। निर्भया सामूहिक दुष्कर्म व हत्या मामले में चारों दोषियों को आज सुबह 5.30 बजे फांसी पर लटका दिया गया। आजाद भारत में फांसी की सजा दिए जाने के इतिहास पर गौर करें तो पहली फांसी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को दी गई थी। वहीं आखिरी फांसी की सजा आज से 4 साल 7 म​हीने और 21 दिन पहले मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन को मिली, जोकि स्वतंत्र भारत की 57वीं फांसी थी।

एक अनुमान के अनुसार, भारत की विभिन्न अदालतों में हर साल लगभग 130 लोगों को मौत की सजा सुनाई जाती है। हालांकि मृत्युदंड पाए कुछ लोग ही होते हैं, जो आखिर में मौत के तख्ते तक पहुंचते हैं। पिछले कुछ वर्षों में फांसी पर लटकाए गए लोगों पर नजर डालें तो धनंजय चटर्जी (14 अगस्त 2004), मुंबई हमले के आरोपी पाकिस्तानी नागरिक अजमल कसाब (21 नवंबर 2012), संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को (9 फरवरी 2013) और मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन (30 जुलाई 2015) को फांसी पर लटकाया गया था।

महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे को दी थी आजाद भारत में पहली फांसी
अंग्रेजों से मिली आजादी के बाद भारत में सबसे पहली फांसी 15 नवंबर 1949 को गांधी के हत्यारे गोडसे को दी गई थी। इस घटनाक्रम पर नाथूराम की याचिका की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश जी. डी. खोसला ने एक किताब लिखी थी। फांसी के बारे में उन्होंने कहा था, जब फांसी के लिए ले जाया जा रहा था, तब गोडसे के कदम कमजोर पड़ रहे थे। उसका व्यवहार और शारीरिक भाव-भंगिमाएं बता रही थी कि वह नर्वस और डरा हुआ है। वह इस डर से लड़ने की बहुत कोशिश कर रहा था और बार-बार अखंड भारत के नारे लगा रहा था, लेकिन उसकी अवाज में लड़खड़ाहट आने लगी थी।

देश में आखिरी फांसी 4 साल 7 म​हीने 21 दिन पहले मेमन को दी गई थी फांसी
वहीं आखिरी बार फांसी पर झूलने वाले खतरनाक अपराधी याकूब मेमन को 12 मार्च 1993 को हुए मुंबई बम धमाकों के लिए दोषी ठहराया गया था। वह पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट था। मेमन की फांसी रोकने की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में पहली बार रात तीन बजे सुनवाई हुई थी। हालांकि मेमन की फांसी नहीं टल सकी और उसे 30 जुलाई 2015 को फांसी पर लटका दिया गया। अब निर्भया के चार दोषियों विनय, मुकेश, अक्षय और पवन को शुक्रवार, 20 मार्च की सुबह 5:30 बजे फांसी पर लटकाया गया।

दोषियों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील एपी सिंह ने आखिरी समय तक फांसी की सजा को कम कराने और मृत्युदंड में देरी के लिए कई प्रयास किए। उनके माध्यम से मौत की सजा पाए दोषियों ने दो दिन पहले ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया, लेकि​न कोई फायदा नहीं हुआ और अब दो घंटे बाद निर्भया से दरिंदगी करने वाले अपराधियों को फांसी पर लटका दिया जाएगा, जिसके बाद आजाद भारत में फांसी पाए लोगों की संख्या 61 तक पहुंच जाएगी।
 

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निर्भया मामले से कानूनी व्यवस्था की खामियों का पता चला : रेखा शर्मा

नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की प्रमुख रेखा शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि निर्भया की आत्मा को आखिरकार अब शांति मिलेगी, क्योंकि उसे अब न्याय मिल गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले से कानूनी व्यवस्था की खामियों का पता चला है।

निर्भया के दोषियों को शुक्रवार तड़के तिहाड़ जेल में दी गई फांसी के बाद शर्मा ने एक के बाद एक कई ट्वीट के जरिए अपनी बातें रखी।

उन्होंने कहा, उम्मीद है कि निर्भया की आत्मा को आखिरकार शांति मिलेगी, क्योंकि उसे न्याय मिला है। उसके माता-पिता ने लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार अपनी बेटी के लिए निर्विवाद रूप से न्याय की यह लड़ाई जीती। चार लोगों को आखिरकार दोषी ठहराया गया और एक युवा मेडिकल छात्रा पर हुए बर्बर अपराध के लिए फांसी दी गई।

शर्मा ने कहा कि इस मामले में कानूनी व्यवस्था की खामियां भी उजागर हुई हैं।

उन्होंने कहा, इस मामले ने हमें कानूनी प्रणाली की खामियों को भी दिखाया, जिसका चार दोषियों ने फायदा उठाया। आज जैसा कि हम जानते हैं कि आखिरकार दोषियों को फांसी मिल गई है तो मुझे उम्मीद है कि यह दूसरों के लिए एक सबक होगा और भविष्य में ऐसे किसी मामले में न्याय मिलने में देरी नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि इन वर्षों में निर्भया की मां आशा देवी ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई में कभी उम्मीद नहीं खोई।

शर्मा ने कहा, आखिरकार निर्भया को न्याय मिला। यह उसके माता-पिता और हम सभी के लिए लंबे समय तक एक दर्दनाक इंतजार रहा। न्याय प्रणाली पर हमारे मन में जो संदेह था, वह दूर हो गया।

निर्भया के साथ 16 दिसंबर 2012 की रात राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर एक चलती बस में निर्मम तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया गया था, जिससे बाद उसकी मौत हो गई थी।

पिछले सात साल से भी अधिक समय तक चले इस चर्चित मामले में आखिरकार शुक्रवार तड़के साढ़े पांच बजे तिहाड़ जेल में निर्भया के चार दोषियों को फांसी दे दी गई।

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Nirbhaya verdict: फांसी से पहले बुरी तरह गिड़गिड़िया और रोया था ये दोषी, लेकिन काम नहीं आए ​हथकंडे

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सात साल पहले हुए निर्भया कांड के चारों दोषियों को शुक्रवार सुबह ठीक 5.30 बजे तिहाड़ जेल के फांसी घर में फांसी दी गई। इसके पहले चारों दोषियों ने अपने बचाव की पूरी कोशिश की जो नाकामयाब रही। वहीं फांसी के लिए जरूरी प्र​क्रियाओं को पूरा करने के दौरान भी दोषियों ने अपना रोना- गाना करने के साथ ही एक बार फिर से माफी मांगी, हालांकि उनके ये हथकंडे भी काम नहीं आए और आखिरकार चारों की फांसी के साथ ही निर्भया को आज इंसााफ मिला। 

बता दें कि 16 दिसंबर 2012 को हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। निर्भया को इंसाफ दिलाने देश के कोने कोने में लोग सड़क पर उतरे थे। फिलहाल जानते हैं फांसी के पहले दोषियों के वकील ने बचाव में क्या किया और रातभर कैसा था चारों दोषियों का हाल…

निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाया, डॉक्टर दोषियों को मृत किया

वकील ने अपनाए ये हथकंडे
फांसी दिए जाने से पहले निर्भया के दोषियों के वकील एपी सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट में डेथ वारंट को टालने के लिए याचिका दायर की, लेकिन गुरुवार रात साढ़े बारह बजे के करीब दोषियों के खिलाफ फैसला आया। दोषियों के वकील ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन इस फांसी को टाली जाने वाली कोई खास दलील यहां नहीं दे सके। जिसके बाद शुक्रवार तड़के करीब 3.30 बजे सुप्रीम कोर्ट ने भी इस याचिका को खारिज कर दिया। 

ऐसी गुजरी रात
जेल सूत्रों के अनुसार, फांसी से पहले निर्भया के दोषियों को गुरुवार की रात नींद नहीं आई। चारों इस रात काफी बेचैन रहे, इसके बाद तड़के चार बजे तिहाड़ जेल के अधिकारी चारों दोषियों के पास पहुंचे। यहां फांसी से पहले की जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद जब दोषियों से नहाने को कहा गया, तो उन्होंने इंकार कर दिया। दोषियों ने कपड़े बदलने के लिए भी मना किया। 

कपड़े बदलने से किया इंकार
सूत्रों ने बताया कि दोषी विनय ने कपड़े बदलने से मना किया और रोते हुए माफी भी मांगी। दोषियों ने फांसी से बचने के लिए बार- बार माफी मांगी। हालांकि चारों को जेल से बाहर लाने से पहले सफेद कुर्ता-पजामा पहनाया गया। वहीं जेल प्रशासन ने चाय-नाश्ता के लिए पूछा, जिसके लिए दोषियों ने इंकार कर दिया। अंत में उनकी आखिरी इच्छा पूछी गई।

7 साल 3 महीने और 3 दिन, हैवानियत की रात से फांसी तक की कहानी

फंदे तक ले जाने में मशक्कत
चारों दोषियों को जब फांसी के फंदे के पास ले जाया जा रहा था तो वे इसके लिए तैयार नहीं थे। जेल सूत्रों के मुताबिक जब चारों गुनहगारों को फांसी के लिए लेकर जाना था तो इनमें से एक दोषी विनय कह रहा था मैं मरना नहीं चाहता। वह बुरी तरह गिड़गिड़िया और कहा, ”मुझे माफ कर दो… मुझे नहीं मरना। इसके बाद वह जमीन में लेटने लगा, ऐसे में उसे ले जाने के लिए काफी मशक्कत करना पड़ी। 

यहां भी नहीं हुए तैयार
जेल सूत्रों ने बताया कि फांसी देने से पहले जब चारों के हाथ पीछे की ओर करके बांधे जा रहे थे तब भी दोषी तैयार नहीं हो रहे थे, लेकिन उनकी कोई बात नहीं सुनी गई। इसके बाद चारों के चेहरे काले कपड़े से ढक दिए गए और गले में फंदा डाला गया। इसके बाद दोषियों के पैरों को बांधा गया और जेल सुपरिटेंडेंट का इशारा मिलते ही पवन जल्लाद ने लीवर खींच दिया। इसी के साथ निर्भया को इंसाफ मिल गया। 

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निर्भया जस्टिस: 4 साल 7 म​हीने और 21 दिन पहले मेमन को दी थी फांसी, आजाद भारत में गोडसे को मिली पहली फांसी 

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। निर्भया सामूहिक दुष्कर्म व हत्या मामले में चारों दोषियों को आज सुबह 5.30 बजे फांसी पर लटका दिया गया। आजाद भारत में फांसी की सजा दिए जाने के इतिहास पर गौर करें तो पहली फांसी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को दी गई थी। वहीं आखिरी फांसी की सजा आज से 4 साल 7 म​हीने और 21 दिन पहले मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन को मिली, जोकि स्वतंत्र भारत की 57वीं फांसी थी।

एक अनुमान के अनुसार, भारत की विभिन्न अदालतों में हर साल लगभग 130 लोगों को मौत की सजा सुनाई जाती है। हालांकि मृत्युदंड पाए कुछ लोग ही होते हैं, जो आखिर में मौत के तख्ते तक पहुंचते हैं। पिछले कुछ वर्षों में फांसी पर लटकाए गए लोगों पर नजर डालें तो धनंजय चटर्जी (14 अगस्त 2004), मुंबई हमले के आरोपी पाकिस्तानी नागरिक अजमल कसाब (21 नवंबर 2012), संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को (9 फरवरी 2013) और मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन (30 जुलाई 2015) को फांसी पर लटकाया गया था।

महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे को दी थी आजाद भारत में पहली फांसी
अंग्रेजों से मिली आजादी के बाद भारत में सबसे पहली फांसी 15 नवंबर 1949 को गांधी के हत्यारे गोडसे को दी गई थी। इस घटनाक्रम पर नाथूराम की याचिका की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश जी. डी. खोसला ने एक किताब लिखी थी। फांसी के बारे में उन्होंने कहा था, जब फांसी के लिए ले जाया जा रहा था, तब गोडसे के कदम कमजोर पड़ रहे थे। उसका व्यवहार और शारीरिक भाव-भंगिमाएं बता रही थी कि वह नर्वस और डरा हुआ है। वह इस डर से लड़ने की बहुत कोशिश कर रहा था और बार-बार अखंड भारत के नारे लगा रहा था, लेकिन उसकी अवाज में लड़खड़ाहट आने लगी थी।

देश में आखिरी फांसी 4 साल 7 म​हीने 21 दिन पहले मेमन को दी गई थी फांसी
वहीं आखिरी बार फांसी पर झूलने वाले खतरनाक अपराधी याकूब मेमन को 12 मार्च 1993 को हुए मुंबई बम धमाकों के लिए दोषी ठहराया गया था। वह पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट था। मेमन की फांसी रोकने की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में पहली बार रात तीन बजे सुनवाई हुई थी। हालांकि मेमन की फांसी नहीं टल सकी और उसे 30 जुलाई 2015 को फांसी पर लटका दिया गया। अब निर्भया के चार दोषियों विनय, मुकेश, अक्षय और पवन को शुक्रवार, 20 मार्च की सुबह 5:30 बजे फांसी पर लटकाया गया।

दोषियों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील एपी सिंह ने आखिरी समय तक फांसी की सजा को कम कराने और मृत्युदंड में देरी के लिए कई प्रयास किए। उनके माध्यम से मौत की सजा पाए दोषियों ने दो दिन पहले ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया, लेकि​न कोई फायदा नहीं हुआ और अब दो घंटे बाद निर्भया से दरिंदगी करने वाले अपराधियों को फांसी पर लटका दिया जाएगा, जिसके बाद आजाद भारत में फांसी पाए लोगों की संख्या 61 तक पहुंच जाएगी।
 

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निर्भया मामले से कानूनी व्यवस्था की खामियों का पता चला : रेखा शर्मा

नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की प्रमुख रेखा शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि निर्भया की आत्मा को आखिरकार अब शांति मिलेगी, क्योंकि उसे अब न्याय मिल गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले से कानूनी व्यवस्था की खामियों का पता चला है।

निर्भया के दोषियों को शुक्रवार तड़के तिहाड़ जेल में दी गई फांसी के बाद शर्मा ने एक के बाद एक कई ट्वीट के जरिए अपनी बातें रखी।

उन्होंने कहा, उम्मीद है कि निर्भया की आत्मा को आखिरकार शांति मिलेगी, क्योंकि उसे न्याय मिला है। उसके माता-पिता ने लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार अपनी बेटी के लिए निर्विवाद रूप से न्याय की यह लड़ाई जीती। चार लोगों को आखिरकार दोषी ठहराया गया और एक युवा मेडिकल छात्रा पर हुए बर्बर अपराध के लिए फांसी दी गई।

शर्मा ने कहा कि इस मामले में कानूनी व्यवस्था की खामियां भी उजागर हुई हैं।

उन्होंने कहा, इस मामले ने हमें कानूनी प्रणाली की खामियों को भी दिखाया, जिसका चार दोषियों ने फायदा उठाया। आज जैसा कि हम जानते हैं कि आखिरकार दोषियों को फांसी मिल गई है तो मुझे उम्मीद है कि यह दूसरों के लिए एक सबक होगा और भविष्य में ऐसे किसी मामले में न्याय मिलने में देरी नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि इन वर्षों में निर्भया की मां आशा देवी ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई में कभी उम्मीद नहीं खोई।

शर्मा ने कहा, आखिरकार निर्भया को न्याय मिला। यह उसके माता-पिता और हम सभी के लिए लंबे समय तक एक दर्दनाक इंतजार रहा। न्याय प्रणाली पर हमारे मन में जो संदेह था, वह दूर हो गया।

निर्भया के साथ 16 दिसंबर 2012 की रात राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर एक चलती बस में निर्मम तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया गया था, जिससे बाद उसकी मौत हो गई थी।

पिछले सात साल से भी अधिक समय तक चले इस चर्चित मामले में आखिरकार शुक्रवार तड़के साढ़े पांच बजे तिहाड़ जेल में निर्भया के चार दोषियों को फांसी दे दी गई।

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बता दें कि 16 दिसंबर 2012 को हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। निर्भया को इंसाफ दिलाने देश के कोने कोने में लोग सड़क पर उतरे थे। फिलहाल जानते हैं फांसी के पहले दोषियों के वकील ने बचाव में क्या किया और रातभर कैसा था चारों दोषियों का हाल…

निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाया, डॉक्टर दोषियों को मृत किया

वकील ने अपनाए ये हथकंडे
फांसी दिए जाने से पहले निर्भया के दोषियों के वकील एपी सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट में डेथ वारंट को टालने के लिए याचिका दायर की, लेकिन गुरुवार रात साढ़े बारह बजे के करीब दोषियों के खिलाफ फैसला आया। दोषियों के वकील ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन इस फांसी को टाली जाने वाली कोई खास दलील यहां नहीं दे सके। जिसके बाद शुक्रवार तड़के करीब 3.30 बजे सुप्रीम कोर्ट ने भी इस याचिका को खारिज कर दिया। 

ऐसी गुजरी रात
जेल सूत्रों के अनुसार, फांसी से पहले निर्भया के दोषियों को गुरुवार की रात नींद नहीं आई। चारों इस रात काफी बेचैन रहे, इसके बाद तड़के चार बजे तिहाड़ जेल के अधिकारी चारों दोषियों के पास पहुंचे। यहां फांसी से पहले की जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद जब दोषियों से नहाने को कहा गया, तो उन्होंने इंकार कर दिया। दोषियों ने कपड़े बदलने के लिए भी मना किया। 

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फंदे तक ले जाने में मशक्कत
चारों दोषियों को जब फांसी के फंदे के पास ले जाया जा रहा था तो वे इसके लिए तैयार नहीं थे। जेल सूत्रों के मुताबिक जब चारों गुनहगारों को फांसी के लिए लेकर जाना था तो इनमें से एक दोषी विनय कह रहा था मैं मरना नहीं चाहता। वह बुरी तरह गिड़गिड़िया और कहा, ”मुझे माफ कर दो… मुझे नहीं मरना। इसके बाद वह जमीन में लेटने लगा, ऐसे में उसे ले जाने के लिए काफी मशक्कत करना पड़ी। 

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