सुबह उठने में होती है परेशानी तो नहीं है आम बात, हो सकती है ये गंभीर बीमारी

सुबह उठने में होती है परेशानी तो नहीं है आम बात, हो सकती है ये गंभीर बीमारी
सर्दी ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। लोग कूलर और एसी से अब फैन पर आ गए हैं। कुछ लोगों ने तो अभी से रजाई भी निकाल ली है। हल्की ठंडी हवा से सुबह की शुरूआत होती है। अब सर्दियों का नाम लिया है तो लोगों को नींद जरा ज्यादा ही आएगी। ये आम धारणा है या यूं कहें कि सर्दी में लोगों को सुबह जल्दी उठने में आलस ज्यादा आता है।

आपने अक्सर लोगों को कहते हुए सुना होगा कि ठंड ज्यादा थी रजाई में से निकलने का मन नहीं किया और इसी तरह के बहाने बनाते हुए रोज-रोज लेट हो जाते हैं, लेकिन इन्हें आप केवल बहाने ना समझें वाकई कई लोगों को सुबह उठने में तकलीफ होती है। कई लोगों की अलार्म सेट करने बाद भी नींद नहीं खुलती। जल्दी उठने की सारी तिकड़म लगाने के बावजूद नींद पर उनका जोर नहीं चलता और वो लोग उठने में लेट हो ही जाते हैं। अगर आपको भी सुबह बिस्तर छोड़ने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है तो आपको इस पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर आप अब तक इसे केवल आलस समझते आए हैं तो बता दें कि ये एक मेडिकल कंडीशन है और इससे दुनिया में काफी संख्या में लोग प्रभावित हैं। डाइसेनिया एक डिसऑर्डर है जिसमें व्यक्ति को सुबह उठने में काफी दिक्कत होती है। आइए जानते है कि आखिर ये डाइसेनिया डिसऑर्डर है क्या और कैसे आप पर इसका असर होता है?

  • हालांकि अधिकतर लोगों को जागने के बाद फिर से सोने का बड़ा मन करता है। डाइसेनिया पीड़ित लोग कई दिनों तक बिस्तर में रह सकते हैं और उठने के ख्याल भर से ही परेशान हो जाते हैं।
  • डाइसेनिया से पीड़ित होने का शक होने पर तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए क्योंकि यह डिप्रेशन, क्रोनिक फैटिग्यू सिंड्रोम और पेन डिसऑर्डर फाइब्रोम्यालगिया का संकेत हो सकता है।
  • डाइसेनिया से पीड़ित होने का दावा करने वाले लोगों का कहना है कि ये डिसऑर्डर भले ही मेडिकली रूप से नहीं पहचाना जा सकता हो, लेकिन यह काफी रियल है।
  • वैसे तो अलॉर्म बजते ही हर किसी को गुस्सा आता है, लेकिन डाइसेनिया मरीजों को बिस्तर से उठने में बहुत ज्यादा दर्द महसूस होता है।
  • ऐसे लोगों को 7-8 घंटे से ज्यादा नींद की जरूरत होती है। यहां तक कि बाहरी दुनिया में चाहे कितनी बड़ी कमिटमेंट हो, उसके बावजूद ये बिस्तर से नहीं निकल पाते हैं।
  • अगर किसी को ऐसा लगता है कि वह इससे पीड़ित है तो उन्हें सुबह उठने के एहसास को कुछ शब्दों में बयां करने की कोशिश करनी चाहिए।
  • अगर भावुक या कमजोरी जैसे शब्द दिमाग में आते हैं तो उन्हें अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए।
  • इसका वैसे तो कोई इलाज नहीं है लेकिन पीड़ितों को बिस्तर पर एक या दो घंटे पहले जाने से थोड़ी राहत मिल सकती है।

नेशनल हेल्थ सर्विस (इंग्लैंड) ने अच्छी नींद के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। 

  • बिस्तर पर जाइए और हर रोज सुबह एक ही समय पर उठें।
  • बेडरूम का माहौल शांत होना चाहिए और तापमान, प्रकाश भी नियंत्रित होना चाहिए।
  • बिस्तर आरामदायक होना चाहिए।
  • सोने से पहले एल्कोहल लेने से बचें और ज्यादा खाना ना खाएं।
  • सोने से पहले धूम्रपान भी ना करें।
  • अपनी चिंताओं को लिख लें और अगले दिन जो चीजें करनी हैं, उनकी लिस्ट बना लें।
  • अगर आप तब भी नहीं सो पा रहे हैं तो उठकर कुछ ऐसा करें जिससे आप थकान का अनुभव करें।
  • डाइसेनिया की मेडिकली पहचान नहीं हुई है इसलिए इसकी वजह भी साफ नहीं है।

 

Source: Bhaskarhindi.com

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