अनंत चतुर्दशी: इस दिन होगा बप्पा का विसर्जन, जानिए किस मुहूर्त में करें पूजा

अनंत चतुर्दशी: इस दिन होगा बप्पा का विसर्जन, जानिए किस मुहूर्त में करें पूजा
अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी का विसर्जन किया जाता है। इस साल 23 सितंबर 2018 दिन रविवार को अनंत चतुर्दशी है। इस दिन पंचक भी हैं गणेश विसर्जन या स्थापना को लेकर लोगों के मन में डर बना रहता है की कुछ अनर्थ तो नही हो जाएगा किन्तु जो स्वयं मुहूर्त हैं जो स्वयं विघ्नहर्ता हैं उनके कार्य में पंचक कैसे बाधा बन सकता हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन भद्रा व पंचक अनिवार्य रूप से होता ही है चाहे दिन में पड़े या रात में।

पंचक का सीधा सा अर्थ है पांच गुणा। पंचक के पांच नक्षत्रों में पूजा, अनुष्ठान करने से पांच गुना अच्छा व शुभ फल ही मिलता है। शास्त्रों में पंचक में शुभ कार्यों व धार्मिक क्रिया कलाप के लिए निषेध नहीं है। इस दिन गणेश पूजा तथा अनंत सूत्र की पूजा हवन दिनभर में किसी भी समय करके विसर्जन कभी भी कर सकते हैं।

कैसे करें विसर्जन ?

परंपरानुसार कहा जाता है कि श्री गणेश को उसी प्रकार बिदा किया जाना चाहिए जैसे हमारे घर का सबसे प्रिय व्यक्ति जब तीर्थ यात्रा पर निकले तब हम जो उसके साथ व्यवहार करते हैं उसी प्रकार गणेश जी को पूर्ण श्रद्धा भाव से विदा करें।

सबसे पहले दस दिनों तक जो आरती-पूजा-अर्चना की है वही करें।
फिर इस दिन विशेष प्रसाद का भोग लगाएं।
अब श्री गणेश के पवित्र मंत्रों से उनका स्वस्तिवाचन करें।

ॐ शांति सुशान्ति: सर्वारिष्ट शान्ति भवतु।
ॐ लक्ष्मीनारायणाभ्यां नम:।
ॐ उमामहेश्वराभ्यां नम:।
ॐ वाणी हिरण्यगर्भाभ्यां नम:।
ॐ शचीपुरन्दराभ्यां नम:।
ॐ मातापितृ चरण कमलभ्यो नम:।
ॐ ईष्टदेवाताभ्यो नम:।
ॐ कुलदेवताभ्यो नम:।
ॐ ग्रामदेवताभ्यो नम:।
ॐ स्थान देवताभ्यो नम:।
ॐ वास्तुदेवताभ्यो नम:।
ॐ सर्वे देवेभ्यो नम:।
ॐ सर्वेभ्यो ब्राह्मणेभ्यो नम:।
ॐ सिद्धि-बुद्धि सहिताय श्रीमन्यहा गणाधिपतये नम:।

एक स्वच्छ पटा या चोकी लें। उसे गंगाजल या गौमूत्र से पवित्र करें। घर की कोई शुद्ध स्त्री उस पर स्वास्तिक बनाएं। उस पर अक्षत रखें फिर उस पर एक पीला, गुलाबी या लाल सुसज्जित वस्त्र बिछाएं। इस पर गुलाब की पंखुरियां बिखेरें। साथ में पटे के चारों कोनों पर चार सुपारी रखें। अब श्री गणेश को उनके जयघोष के साथ स्थापना वाले स्थान से उठाएं और इस पटे पर विराजित करें। पटे पर विराजित करने के उपरांत उनके साथ फल, फूल, वस्त्र, दक्षिणा, 5 मोदक रखें। एक छोटी लकड़ी लें। उस पर चावल, गेहूं और पंच मेवा की पोटली बनाकर बांधें और यथाशक्ति दक्षिणा (सिक्के) रखें। मान्यता है कि मार्ग में उन्हें किसी भी प्रकार के कष्टों का सामना न करना पड़े। इसलिए जैसे पुराने समय में घर से निकलते समय जो भी यात्रा के लिए तैयारी की जाती थी वैसी श्री गणेश जी की विदाई के समय की जानी चाहिए।

फिर नदी, तालाब या पोखर के किनारे विसर्जन से पूर्व कपूर की आरती पुन: संपन्न करें। श्री गणेश से खुशी-खुशी विदाई की कामना करें और उनसे धन, सुख, शांति, समृद्धि के साथ आशीर्वाद प्राप्त करें। इन दस दिन में जो भी जाने-अनजाने में त्रुटी हुई हो उसके लिए क्षमा प्रार्थना भी करें। वैसे तो इस दिन देशभर में विसर्जन के कार्यक्रम होंगे। कोई नदियों में विसर्जन करेगा तो कोई तालाबों में। अगर हम गणेश प्रतिमा का अपने घर में ही विसर्जन करें तो न केवल गणेशजी हमारे घर में ही रहेंगे, अपितु हम अपने वातावरण एवं नदी-तालाबों का पानी प्रदूषित होने से भी बचा लेंगे।

हम सबका ये छोटा सा प्रयास एक नई परंपरा को जन्म देगा और साथ में पर्यावरण को बचाने की दिशा में सार्थक कार्य रहेगा। पीओपी से बनी प्रतिमा जल्दी पानी में पूरी तरह गल नहीं पाती हैं महीनों तक वह पानी में घूमती रहती है और इससे जल भी प्रदूषित होता है। पूरी तरह गल नहीं पाने के कारण भगवान की प्रतिमा नदी-तालाब के किनारों पर इकठ्ठा हो जाती है, इससे हमारी आस्था का घोर अपमान भी होता है। यदि किसी कारणवश आप मिट्टी की प्रतिमा स्थापित नहीं कर पाए हैं तो भी उनका भी विसर्जन घर में ही करें। जिससे कम से कम हम तालाब-कुंडों-नदियों को प्रदूषित होने से बचा सकें।

घर में ऐसे करें विसर्जन आप टब, बाल्टी या टंकी में गणेश जी की प्रतिमा विसर्जित कीजिए। जब प्रतिमा पूरी तरह गल जाए तब आप उस पानी व मिट्‌टी को अपने बगीचे या गमले में डाल दीजिए। इस मिट्टी में तुलसी का पौधा भी लगा सकते हैं। या चाहें तो घर के किसी पौधे के नीचे रख दे और प्रतिदिन उस पौधे में पानी देते रहें इससे प्रतिमा कुछ समय में घुल जाएगी और गमले या बगीचे को मिट्टी मिल जाएगी हमारी आस्था, नदी, तलब और प्रकृति का वातावरण भी शुद्ध बना रहेगा।

Source: https://www.bhaskarhindi.com/news/anant-chaturdashi-2018-date-time-and-puja-vidhi-of-visarjan-48691

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