कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को क्यों माना जाता है शिवरात्रि का दिन

कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को क्यों माना जाता है शिवरात्रि का दिन

डिजिटल डेस्क । हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का दिन माना जाता है। जो इस बार 8 सितम्बर 2018 को है। हिन्दू धर्म के अनुसार प्रत्येक माह की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित शिव चतुर्दशी का व्रत किया जाता है। भविष्यपुराण के अनुसार प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को “शिव चतुर्दशी” कहते हैं। इस दिन पूरे विधि-विधान से शिव जी की पूजा की जाती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि के बंधन से मुक्त हो जाता है। कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं। इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ शिव परिवार के सभी सदस्यों की उपासना जाती है, एवं सुख-शांति की कामना हेतु शिव का पूजन किया जाता है।

शिव चतुर्दशी व्रत का फल 

शिव चतुर्दशी का व्रत जो भी व्यक्ति पूरे श्रद्धाभाव से करता है उसके माता-पिता के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त उसके स्वयं के भी सारे कष्ट दूर हो जाते हैं तथा वो जीवन के सम्पूर्ण सुखों का भोग करता है। इस व्रत की महिमा से व्यक्ति दीर्घायु, ऐश्वर्य, आरोग्य, संतान एवं विद्या आदि प्राप्त कर अंत में शिवलोक जाता है। इस दिन शिव पर पुष्प चढ़ाने तथा शिव के मंत्रों के जप का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन पूरे विधि-विधान एवं मंत्र जाप से शिव की पूजा करने से मनुष्य काम-क्रोध, लोभ-मोह आदि के बंधन से मुक्त हो जाता है।

शिव चतुर्दशी

हिंदु शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि का दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के आधार पर हिंदू पंचांग की चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं। इसी के साथ पौराणिक मान्यताओं में दिव्य ज्योर्तिलिंग का प्राकट्य भी चतुर्दशी तिथि को ही माना गया है। इन्हीं सभी महत्वपूर्ण तथ्यों के आधार पर चतुर्दशी तिथि के दिन भगवान शंकर की पूजा तथा व्रत एवं मंत्र जप का विधान है। विधिपूर्वक व्रत रखने पर तथा शिवपूजन, शिव कथा, शिव स्तोत्रों का पाठ व “ॐ नम: शिवाय” का जप करते हुए रात्रि जागरण करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता हैं। व्रत के दूसरे दिन ब्राह्माणों को यथाशक्ति भोजन, दक्षिणादि प्रदान करके संतुष्ट किया जाता हैं।

शिवरात्रि व्रत की महिमा

इस व्रत के विषय में ये मान्यता है कि इस व्रत को जो व्यक्ति करता है, उसे सभी भोगों की प्राप्ति के बाद, मोक्ष गति की प्राप्ति होती है| ये व्रत सभी पापों का क्षय (नाश) करने वाला होता है। इस व्रत को निरंतर करने के बाद विधि-विधान के अनुसार इसका उद्यापन कर देना चाहिए।

उपवास की पूजन सामग्री में जिन वस्तुओं को प्रयोग किया जाता वे इस प्रकार हैं- 

पंचामृत (गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद,शर्कर्रा), सुगंधित फूल, शुद्ध वस्त्र, बिल्व पत्र, धूप, दीप, नैवेध, चंदन का लेप, ऋतुफल आदि। इस व्रत में चारों पहर में पूजन किया जाता है, प्रत्येक पहर की पूजा में “उँ नम: शिवाय” और “शिवाय नम:” का जाप करते रहना चाहिए और यदि शिव मंदिर में ये जाप करना संभव न हों, तो घर की पूर्व दिशा में, किसी शान्त स्थान पर बेठकर इस मंत्र का जाप किया जा सकता हैं। चारों पहर में किए जाने वाले इन मंत्र जापों से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त उपावस की अवधि में शिव जी का रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न होते है।

शिव चतुर्दशी व्रत विधि 

पुराण के अनुसार शिव चतुर्दशी व्रत में भगवान शिव के साथ माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी और शिवगणों की पूजा की जाती हैपूजा का आरम्भ भोलेनाथ के अभिषेक के साथ होता है। इस अभिषेक में जल, दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, शक्कर या चीनी,गंगाजल तथा गन्ने के रसे आदि से स्नान कराया जाता है। अभिषेक कराने के बाद बेलपत्र, समीपत्र, कुशा तथा दूब आदि से शिवजी को प्रसन्न करते हैं। अंत में भांग, धतूरा और श्रीफल भोलेनाथ को भोग के रुप में चढ़ाया जाता है। शिव चतुर्दशी का व्रत करने वाले जातक को त्रयोदशी के दिन मात्र एक समय भोजन करना चाहिए।

रात्रि में स्वच्छ वस्त्र धारण कर शुद्ध आसन पर बैठकर भगवान भोलेनाथ का ध्यान करना चाहिए. उनके मंत्र की माला का जाप करना शुभफलदायी होता है. शिवभक्त अपनी श्रद्धा तथा भक्ति के अनुसार शिव की उपासना करते हैं। चारों ओर का वातावरण शिव भक्ति से ओत-प्रोत रहता है। शिव की भक्ति के महत्व का वर्णन ऋग्वेद में किया गया है। शिव चतुर्दशी में भगवान की पूजा करने में निम्न मंत्र जाप करने चाहिए। शिव चतुर्दशी पर इन मंत्रों से शिव का पूजन करने से जीवन की कठिन से कठिन समस्या भी दूर हो जाती है।

शिव का पंचाक्षरी मंत्र – 

‘ॐ नम: शिवाय’ इस मन्त्र की एक माला का जप करें।

जीवन में कठिन समय आने पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके श्रद्धापूर्वक इस का 1 लाख जप करना चाहिए।

‘ॐ नमः शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू शिवाय नमः ॐ’

यह मंत्र कठिन से कठिन समस्या और विघ्न बाधा को नष्ट कर देता है।

समस्त कष्टों से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र –

‘ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्ब कं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योार्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ’।

एक माला का जाप करें

एवं शिव का ये विशेष मंत्र – ‘शिवाय नम:’ एक हजार बार जपे।

रात को सोते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए:

शंकराय नमसेतुभ्यं नमस्ते करवीरक।
त्र्यम्बकाय नमस्तुभ्यं महेश्र्वरमत: परम्।।
नमस्तेअस्तु महादेवस्थाणवे च ततछ परमू।
नमः पशुपते नाथ नमस्ते शम्भवे नमः।।
नमस्ते परमानन्द नणः सोमार्धधारिणे।
नमो भीमाय चोग्राय त्वामहं शरणं गतः।।

मान्यता है कि शिव मंत्रों का जाप शिवालय यानि शिव मंदिर या घर के पूर्व भाग में बैठकर करने से अधिक फल प्राप्त होता है। चतुर्दशी व्रत एवं पूजन के उपरांत ब्राह्मणों को भोजन कराके ही स्वयं भोजन करना चाहिए।

Source: Bhaskarhindi.com

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